• 4 October, 2026 - 9:48 PM

ग्लोबल शिपिंग कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अनधिकृत लॉजिस्टिक्स शुल्क पर रोक लगाएं

ग्लोबल शिपिंग कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अनधिकृत लॉजिस्टिक्स शुल्क पर रोक लगाएं

ग्लोबल शिपिंग कंपनियां भारतीय बंदरगाहों पर मनमाने और अनधिकृत लॉजिस्टिक्स शुल्क वसूल रही हैं। विदेशी शिपिंग लाइनों या टर्मिनल ऑपरेटरों की ओर से देरी या परिचालन संबंधी खामियां होने पर भी इसका वित्तीय बोझ और कंटेनर डेमरेज जुर्माना भारतीय निर्यातकों और आयातकों पर डाल दिया जाता है। एक प्रभावी नियामक ढांचे (Regulatory Framework) के अभाव में भारतीय व्यापारी असहाय महसूस कर रहे हैं और शिपिंग कंपनियों के खुले शोषण का शिकार हो रहे हैं। यह बात फेडरेशन ऑफ कस्टम्स ब्रोकर्स एसोसिएशन इन इंडिया (FCBA India) के अध्यक्ष पार्थिव दवे ने कही।

मनमाना डेमरेज शुल्क

खाली कंटेनरों को वापस जमा करने के लिए जब शिपिंग कंपनियों के पास उपयुक्त डिपो या सुविधाएं नहीं होती हैं, तब भी ग्राहकों से भारी जुर्माना वसूला जा रहा है। इसके अलावा, टर्मिनल हैंडलिंग चार्ज (THC) और स्थानीय अधिभार (Local Surcharges) बिना किसी सरकारी मंजूरी या सीमा (Capping) के वसूले जा रहे हैं।

अनिवार्य विवाद निवारण तंत्र की मांग

डेमरेज और लॉजिस्टिक्स शुल्कों से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) स्थापित करने की तत्काल मांग की जा रही है। अनियंत्रित शुल्कों के कारण भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ रही है, जिससे भारतीय व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो रही है।

भारतीय निर्यातकों पर अनियंत्रित लॉजिस्टिक्स शुल्क का प्रभाव

मुद्दा / क्षेत्र वर्तमान स्थिति वित्तीय और व्यावसायिक प्रभाव
उत्पाद लागत और मार्जिन अप्रत्याशित डेमरेज और सरचार्ज से कुल निर्यात लागत बढ़ जाती है। मुनाफा काफी घट जाता है, जिससे टेक्सटाइल, फार्मा और केमिकल जैसे क्षेत्रों का प्रॉफिट मार्जिन खत्म हो जाता है।
कंटेनर वापसी में देरी यार्ड में जगह न होने के कारण शिपिंग लाइनें खाली कंटेनर स्वीकार करने में देरी करती हैं। छोटे निर्यातकों पर रोजाना भारी जुर्माना लगता है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी (Working Capital) फंस जाती है।
ग्लोबल ऑर्डर रद्द होना पोर्ट पर देरी और अनियमित शिफिंग शेड्यूल से व्यापार बाधित होता है। विदेशी खरीदार ऑर्डर रद्द कर देते हैं और चीन या वियतनाम जैसे देशों की ओर रुख करते हैं।

मलेशिया और ब्राजील के कड़े नियम: निर्यातकों को बड़ा फायदा

भारत के विपरीत, मलेशिया और ब्राजील जैसे देशों ने अपने घरेलू निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए कड़े नियामक कदम उठाए हैं।
  • मलेशिया का नियंत्रित टैरिफ मॉडल: मलेशिया में पोर्ट टैरिफ और कंटेनर हैंडलिंग फीस को परिवहन मंत्रालय और पोर्ट कलैंग अथॉरिटी (PKA) जैसी वैधानिक संस्थाओं द्वारा सीधे मंजूरी दी जाती है। दरों में बदलाव केवल सरकारी राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन के बाद और बहु-वर्षीय चरणबद्ध योजना के अनुसार ही लागू होता है। इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ मलेशियन मैन्युफैक्चरर्स (FMM) से सलाह लिए बिना दरों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
  • ब्राजील का ANTAQ मॉडल: ब्राजील के वॉटरवे रेगुलेटर (ANTAQ) ने कंटेनर डेमरेज नियमों (Resolution 62/2021) की समीक्षा की है। उपभोक्ता-अनुकूल नियमों के तहत, यदि शिपिंग लाइन, टर्मिनल या डिपो की लॉजिस्टिक्स विफलता के कारण कंटेनर वापसी में देरी होती है, तो निर्यातक या आयातकर्ता पर कोई डेमरेज नहीं लगाया जा सकता।
  • डेमरेज क्लॉक को रोकना: खाली कंटेनर वापस करने का पहला प्रयास विफल होते ही डेमरेज की समय सीमा को तब तक के लिए रोक दिया जाता है, जब तक कि शिपिंग लाइन उपयुक्त डिपो सुविधा प्रदान न करे। इन उपायों से मलेशिया और ब्राजील के निर्यातकों को पारदर्शी लागत और मनमाने जुर्माने से सुरक्षा मिलती है।

भारत में कानूनी और परिचालन संबंधी खामियों का दुरुपयोग

भारत में एकीकृत डेमरेज रेगुलेटरी फ्रेमवर्क न होने के कारण विदेशी शिपिंग कंपनियां खामियों का फायदा उठाती हैं।
उदाहरण: अहमदाबाद या लुधियाना का एक निर्यातक मुंबई (JNPT) या मुंद्रा पोर्ट पर 20 कंटेनर भेजता है, जिसमें खाली कंटेनर लौटाने के लिए 14 दिन का मुफ्त समय मिलता है। 8वें दिन जब निर्यातक डिपो पहुंचता है, तो ऑपरेटर यह कहकर इनकार कर देता है कि “यार्ड में जगह नहीं है” या “सर्वर डाउन है।”
गड़बड़ी शिपिंग कंपनी की तरफ से होने के बावजूद, 14 दिन पूरे होते ही शिपिंग कंपनी ‘डेमरेज क्लॉक’ चालू कर देती है और $100 से $150 प्रति कंटेनर प्रतिदिन का जुर्माना लगाती है। भारत में ANTAQ जैसा कोई रेगुलेटर न होने के कारण, शिपिंग लाइनें जुर्माना न भरने तक ‘बिल ऑफ लेडिंग’ (Bill of Lading) रोक लेती हैं, जिससे निर्यातकों को मजबूरी में लाखों रुपये का अवैध जुर्माना भरना पड़ता है।

FCBA इंडिया की प्रमुख मांगें

FCBA इंडिया के अध्यक्ष पार्थिव दवे के नेतृत्व में सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख समाधान पेश किए गए हैं:
  1. शिपिंग लाइन रेगुलेटरी अथॉरिटी: मलेशिया और ब्राजील की तर्ज पर शिपिंग टैरिफ और डेमरेज पर नजर रखने के लिए एक समर्पित नियामक संस्था का गठन किया जाए।
  2. ऑटोमेटेड कंटेनर ट्रैकिंग: कंटेनर रिटर्न और गेट-इन प्रक्रिया को लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक और कस्टम्स के ICEGATE पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि देरी की वजह ऑनलाइन सत्यापित हो सके।
  3. लोकल सरचार्ज पर कैपिंग: अनियंत्रित स्थानीय सरचार्ज पर सीमा लगाने और केवल सरकार द्वारा स्वीकृत दरों को ही लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय को ड्राफ्ट चार्टर सौंपा गया।

निष्कर्ष

भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दे रहा है, तब लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की ये अनियमिताएं बहुत बड़ी बाधा हैं। मलेशिया और ब्राजील के मॉडल से यह स्पष्ट है कि घरेलू उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शिपिंग लाइनों की मनमानी पर लगाम लगाना आवश्यक है।
FCBA इंडिया द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण और समयानुकूल है। यदि भारत सरकार बंदरगाहों पर नीतिगत सुधार तेजी से लागू नहीं करती है, तो भारतीय निर्यातक विदेशी शिपिंग कंपनियों के आर्थिक शोषण का शिकार होते रहेंगे।

Read Previous

DGFT એ નિકાસ ખર્ચ ઘટાડવા અને TRADE સરળ બનાવવા માટે સૂચનો મંગાવ્યા

Read Next

શેરબજાર અત્યારે નિર્ણાયક મોડ પરઃ નિફ્ટી અને સેન્સેક્સ, વધુ કડાકો અટકાવવા મજબૂત બાઉન્સબેક જરૂરી

Most Popular